Wednesday, September 10, 2025

मित्र नहीं शत्रु

हमारे जीवन में मित्र और शत्रु बड़े मयाने रखते हैं, मित्र वो जो हमारा हित चाहे जो हमारे सुख दुःख में हमारी सहायता करे, हमारा साथ दे कुछ मित्र जन्म से बनतें हैं, कुछ मित्र हम स्वयं बनाते हैं, कुछ मित्र परिवार में मिल जाते हैं तो कुछ जीवन की यात्रा में परन्तु शत्रु हमें जीवन में कभी भी मिल जाते हैं, मैंने ज्यादातर मित्रों को ही शत्रु बनते भी देखा है क्योंकि एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर लोग आपकी तरक्की से जलते हैं और उनमें आपके कुछ मित्र भी हो सकतें हैं इसलिए मित्र मंडली हमेशा सोच समझकर बनानी चाहिए। पता नहीं कब वो आपका शत्रु बन जाए और आपको नीचा गिराने के लिए दिन-रात षड्यंत्र करने लगे।

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