Wednesday, September 10, 2025

महत्वकांक्षा

जब कोई व्यक्ति किसी महत्वकांक्षा को लेकर कोई कार्य करता है और वह जब पुर्ण नहीं होती तब वह उसे पुर्ण करने के लिए बहुत छटपटाता है यहीं पर मनुष्य के स्वाभाव व उसके व्यक्तित्व का परिचय होता है कोई उछल-कुद करके बर्बाद हो जाता है, कोई शांत रहकर नये -नये अवसरों की खोज में लग जाता है अब फैसला आपको करना है आप की कौन सी महत्वकांक्षा पुरी नहीं हुई कहीं आपके छटपटाने या शांत रहने की वजह वही तो नहीं अर्थात आप सब क्या कर रहें हैं न जाने कौन सी किसकी महत्वकांक्षा अभी बाकी है, ये महत्वकांक्षा कुछ भी हो सकती है और ये सबकी हो सकती है फर्क सिर्फ इतना रहेगा लोगों की हैसियत के हिसाब से बड़ी-छोटी होती जाएगी और कुछ लोगों की नित-दिन नई-नई महत्वकांक्षा जागती रहती है लेकिन आपकी इन महत्वकांक्षाओं के पुर्ण या अपूर्ण होने के दौरान कई निर्दोष व बेगुनाह लोग बकरे की बली की तरह चढ़ जातें हैं कृपया अपनी महत्वकांक्षा पुर्ण या अपूर्ण होने के दौरान मानवता को जिंदा रखिए। इस पोस्ट को कृपया कोई व्यक्तिगत न ले, ये सम्पूर्ण मानव समाज के लिए है जो कहीं न कहीं अपनी मानवता,आध्यात्मिकता, सामाजिकता,व्यवहारिकता खो रहा है।

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